Solar Panel Energy Plant | सौर पैनल ऊर्जा प्लांट का खर्च तथा सब्सिडी, लगाने की प्रक्रिया

हेल्लो दोस्तों, अगर आप भी सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली आपूर्ति करना चाहते हैं। तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। आप अपने घर की छत पर तथा खाली खेत में सोलर पैनल इंस्टॉलेशन करवा कर बिजली की आपूर्ति कर सकते हैं। तथा अधिक मात्रा में बिजली का उत्पादन कर बिजली कंपनी को बेच भी सकते हैं और एक अच्छी आमदनी का स्रोत बना सकते हैं। Solar Panel Energy Plant सरकार द्वारा सब्सिडी दी जा रही है। 

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सोलर पैनल एक बार इंस्टॉलेशन होने के बाद 25 वर्षों तक सर्विस देते हैं। अर्थात अब बिजली की 25 वर्षों तक कोई चिंता नहीं रहेगी। Solar Plant लगवाने के लिए सरकार के तरफ से आर्थिक और तकनीकी सहयोग भी दिया जा रहा है। तो अब जानते हैं दोस्तों कैसे सोलर पैनल के लिए आवेदन करना है। तथा इस में कितनी लागत आने वाली है और इसे लगाने की क्या प्रक्रिया है इस लेख में संपूर्ण जानकारी ध्यानपूर्वक पढ़े। 

Solar Subsidy Scheme Highlights

योजना का नामसब्सिडी सोलर पैनल योजना
योजना शुरू की गई केंद्रीय स्तर पर
योजना उद्देश्यबिजली की खपत को कम करना और निजी घरों में सोलर की पहुंच को बढ़ाना
अधिकतम सब्सिडीकीमत का 65% तक
राज्य में लागू सभी राज्यों में 
लाभार्थी होंगे केंद्रीय स्तर पर भारत का हर एक व्यक्ति

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सोलर पैनल का खर्च तथा सब्सिडी (Solar Panel Energy Plant Subsidy & Cost)

दोस्तों घर के सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बिजली आपूर्ति के लिए लगभग हर घर का कॉमन बिल ₹ 2000 प्रति महीना आता है  और अगर आप 2 किलो वाट सोलर पैनल लगाते हैं तो यह बिल अमाउंट शून्य हो सकता है। सोलर पैनल ऑन ग्रेड पर ₹ 54000 की लागत आती है। तथा ऑफ ग्रेड पर ₹ 90000 की लागत आएगी। वहीं पर 2 किलो वाट सोलर पैनल का खर्चा ₹ 108000 से ₹ 180000 तक आ सकता है सरकार द्वारा सोलर पैनल इंस्टॉलेशन पर 65% सब्सिडी दी जाती है। सोलर पैनल पर हर राज्य की अलग-अलग सब्सिडी स्कीम्स है। अपने राज्य के अनुसार आप स्कीम देख सकते हैं। तथा सरकार द्वारा निर्धारित सब्सिडी परसेंटेज के अनुसार आप अपने खर्च का अनुमान लगा सकते हैं। 

सोलर पैनल के प्रकार तथा क्षमता (Types and Capacity of Solar Panels)

सोलर पैनल के सिस्टम अभी तीन प्रकार के आते हैं। जिसमें से है ऑन ग्रिड सिस्टम, ऑफ ग्रिड सिस्टम तथा हाइब्रिड सिस्टम  सोलर पैनल में यह तीन प्रकार ही मुख्य तौर पर इंस्टॉलेशन किए जाते हैं। आप यह समझिए अगर आप घर की छत पर ऑन ग्रिड और ऑफ ग्रेट सिस्टम इनस्टॉल करवाते हैं। अगर आप ऑफ ग्रेड सिस्टम इनस्टॉल करवाते हैं तो आप इसे रेगुलर चालू रखते हैं और बिजली की आपूर्ति लगातार जारी रहती है। इस ऊर्जा को आप सहज नहीं सकते। ऑन ग्रिड सिस्टम में बिजली लगातार चालू रहती है और इसे  ग्रेड से आ रही बिजली से जोड़ दिया जाता है और इसमें घरेलू मीटर की जगह नेट मीटर लगाया जाता है जो यह दर्शाता है कि आपने कितनी बिजली की आपूर्ति की है तथा कितनी बिजली का उपभोग किया है। इसके अनुसार आपकी आमदनी होती है। 

 ऑफ ग्रिड सिस्टम में आप बिजली को बैटरी के माध्यम से सहेज सकते हैं और जब चाहे इसका उपयोग कर सकते हैं। बैटरी की लाइफ 5 साल की होती है आप 5 साल बाद बैटरी बदल भी सकते हैं। 

 हाइब्रिड सिस्टम सोलर पैनल में हाइब्रिड सिस्टम ऑन ग्रिड और ऑफ ग्रिड दोनों का काम करता है। अगर आप चाहें तो बैटरी के माध्यम से ऊर्जा को सहज  सकते हैं और चाहे तो इसे बेच भी सकते हैं।   

सोलर पैनल सिस्टम लगाने की प्रक्रिया (Solar Panel Energy Plant Installation Process)

 अगर आप अपने घर की छत तथा खाली खेत में ऊर्जा पैनल इंस्टॉलेशन करवाना चाहते हैं। तो इसके लिए सबसे पहले आपको सोलर कंपनी से संपर्क करना चाहिए। तथा अपना आवेदन सोलर कंपनी को सबमिट करें। 

आपके आवेदन को स्वीकार कर कंपनी के अधिकारी घर का निरीक्षण करेंगे तथा तय कर पाएंगे कि इस घर को कितने बिजली की आवश्यकता है। तथा कितने वाट का सोलर पैनल यहां पर इनस्टॉल किया जा सकता है। 

निरीक्षण होने के बाद उचित सोलर पैनल इंस्टॉल कर दिया जाता है शुरू में सौर पैनल का संपूर्ण खर्चा आवेदक को ही देना होता है। कंपनी द्वारा सोलर पैनल की जानकारी सरकारी वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाती है। 

 सरकार को जानकारी मिलते ही एक अधिकारी इंस्टॉलेशन किए हुए सोलर पैनल का निरीक्षण करने आते हैं तथा सब इंस्टॉलेशन तथा सुचारू रूप से शुरू सोलर पैनल को देखने के बाद सब्सिडी की राशि आवेदक के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है

Offficial website- https://mnre.gov.in/solar/schemes or https://solarrooftop.gov.in/

FAQs on Solar Panel System

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